स्वामी विवेकानंद के बारे में कुछ विशेष बात जो हम नहीं जानते है .

         स्वामी विवेकानंद जीवनी  




 नमस्ते दोस्तों में संतोष कुमार सिंह आप सभी readers का अपने ब्लॉग deshduniya111.Blogspot.Com में आप सभी का स्वागत करता 
हूँ . दोस्तों जीवन को सही तरिके से जीने के लिए जीवन में हमेशा कुछ नया करना चाहिए और नया कुछ सिखना चाहिए चलिए आज स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से कुछ सिख हासिल करते है पहले तो हम उनके बारे में कुछ जान ले की वो कोन थे और क्या सीखेंगे .

 स्वामी विवेकानंद एक आधात्यमिक गुरु तथा समाज सुधरक
 थे  स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता में हुआ था . उनका बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दता था बचपन में जैसे सभी बच्चे नटखट और जिग्यसा वादी होते है विल्कुल वैसे ही थे अपने स्वामी विवेकानंद जी उनके पिता जी का नाम विश्वनाथ दता था जोकि कोलकाता हाईकोर्ट के प्रशिद्ध वकील थे और उनके दादा जी का नाम दुर्गाचरण दता था वो संस्कृत और फारसी के विद्वान थे 

 स्वामी विवेकानंद जी की प्रारम्भिक शिक्षा   1871 ईस्वी में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संस्थान में हुई.  चर्च
  
  बाकि की पढ़ाई  स्कॉटिश चर्च कॉलेज (1884) में हुई 
 स्वामी विवेकानंद वेद उपनिषद भगवतगिता रामायण महाभारत और पुराणों के आलावा अनेक हिन्दू शाश्त्रो में गहन रूचि रखते थे.
  स्वामी विवेकानंद जी के पिता जी का 1884 में निधन हो गया था जिस के कारण उनपर पुरे घर की जिम्मेदारी आ गई थी उसके बाबजूद भी उन्होंने अपना कर्तव्य पूरा किया और २५ साल की उम्र में सन्यासी बन गए. 
 
उनको स्वामी विवेकानंद की उपाधि उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने दी थी .

 उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन 1893  में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था जिसमे उन्हें 2 मिंट का समय मिला था जिस में उन्होंने वंहा उपस्थित लोगो को भाई और बहन का सम्बोधन देते हुए अपनी बात रखी जिससे वंहा के लोग बहुत प्रभावित हुए  

  एक समय की बात है स्वामी जी के मित्र ने बहुत अनुरोध किया की मित्र आप अपने गुरु जी से मिलवाये तो स्वामी जी अपने मित्र को लेकर रामकृष्ण परमहंस जी के पास गए तो उनको देख कर उनका मित्र बोला मित्र ये तुम्हारे मित्र कैसे हो सकते है . इनको कपड़े पहने का ढंग नहीं है तो स्वामी जी ने काहा मित्र तुम्हारे देश में चरित्र का निर्माण एक दर्जी करता है लेकिन हमारे देश में चरित्र का निर्माण आचार और विचार करते है . 

 शिकागो में वहाँ पे किसी ने स्वामी जी से पूछा की आप के यहाँ सबसे बड़ी नदी कोन सी है जिस पर स्वामी जी ने कहा यमुना नदी तो फिर उस व्यक्ति ने कहा मेंने सुना है की गंगा नदी बहुत बड़ी है उस पर स्वामी जी ने कहा गंगा नदी नहीं है बल्कि हमारी माँ है .

 वैसे तो उनके जीवन में बहुत सी घटना ऐसे हुई है जिस से की हमे सिखने को बहुत कुछ मिल सकती है एक बार किसी गोरी मेम ने स्वामी जी से कहा की आप मुझ से शादी कर लीजिये ताकि में आप जैसे महान और पसिद्ध पुत्र को जनम दे सकूँ उस पर स्वामी जी ने कहा में एक सन्यासी ही और में परिवारिक जीवन का त्याग कर चूका हु  इसी लिए में आप से व्याह नहीं क्र सकता बहुत जिद करने पर स्वामी जी ने कहा एक काम करे आप मुझे आप अपना पुत्र मान ले और में आप को माँ मान लेता हूँ जिस से आप की इच्छा भी पूरी हो जाएगी और मेरा धर्म भी तो ऐसे थे अपने स्वामी जी. 

 स्वामी जी के विचार 
 जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी |

 उठो और जागो तब तक रुको नहीं जब तक की तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते |

   जब तक जीना तब तक सीखना , अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है |

  कभी भी यह मत सोचो की तुम्हारे लिए तुम्हारी आत्मा के लिए कुछ भी नामुमकिन है |

 अगर कोई पाप है तो वो खुद को और दूसरे को कमजोर समझना |
  यह पुस्तक बहुत ही अच्छी पुस्तक है खरीदने के लिए लिंक पर  clik करें .
     किसी को दोष मत दो |   अगर तुम अपने हाथ आगे बढ़ा कर किसी की मंदद कर सकते हो तो करो नहीं तो अपना हाथ बांध कर खरे रहो |

 ब्रह्माण्ड की सारी शक्तिया पहले से ही हमारी है |
  वो हमी है जो अपने आँखों पर हाथ रख लेते है और रोते  है
 की कितना अँधेरा है |

   जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो ठीक उसी समय पर उसे करना चाहिए नहीं तो लोगो का विस्वास उठ जाता है |

  सच्चाई के लिए कुछ भी छोड़ देना चाहिए पर किसी के लिए सच्चाई नहीं छोड़नी चाहिए |        

  पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता और एकाग्रता के लीये जरूरी है ध्यान ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर सयम रख 
सकते है |

  एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उस में दाल दो और बाकि सब कुछ भूल जाओ |


  हम वो है जो हमारी सोच ने बनाया है , इसी लिए इस बात का ध्यान रखिये की आप क्या सोचते है जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे |  यदि तुम खुद को कमजोर समझोगे तो कमजोर हो जाओगे अगर खुद को ताकतवर समझोगे तो ताकतवर हो जाओगे |


  एक विचार लो उस विचर को अपने जीवन बना लो उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो उस विचार को जिओ अपने मस्तिक मांसपेशियों नशो शरीर हर हिस्से को उस विचार में डुब जाने दो बाकि सभी विचार को किनारे रख दो यही सफल होने का तरीका है |








Comments